जानिये…! कैसे सिस्टम की कृपादृष्टि ने बदली भू-माफिया की किस्मत ! पुल निर्माण की अनुमति से करोड़ों के वारे-न्यारे !!



रुद्रपुर।जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसमें सिस्टम की कृपादृष्टि से एक भू-माफिया के करोड़ों के वारे न्यारे होने की प्रबल संभावना बन गई है।जानकारी के मुताबिक रुद्रपुर से चंद किलोमीटर की दूरी पर एक पूंजीपति की कई एकड़ जमीन है,जिसके बीचों-बीच से होकर एक नदी बहती है।उक्त नदी के एक किनारे पर उक्त पूंजीपति ने कई गोदाम बनाकर किराये पर उठा दिये हैं तो वहीं नदी के पार उसकी कई एकड़ जमीन पर खेती होती रही है।खेती की जमीन तक पहुंचने के लिये काफी लम्बा चक्कर लगाकर जाना पड़ता था।बताया जाता है कि वर्ष 2024 में उक्त भूमि के स्वामी ने जिला प्रशासन को नदी पर पुल बनाने के बाबत एक प्रार्थना पत्र सौंपा था जिसमें पुल के निर्माण में आने वाली पूरी लागत स्वयं वहन करने की बात कही गई थी।पुल निर्माण के लिये दिये गये आवेदन पत्र में नदी किनारे एक सार्वजनिक मार्ग होने और पुल बनने पर होने वाली आवाजाही से आमजन को सुविधा होने का दावा किया गया था लेकिन मौके पर पहले से ही ना तो कोई भी सार्वजनिक मार्ग है और ना ही पुल बनने के बाद आमजन को कोई खास सुविधा ही मिलने वाली है।सूत्रों के मुताबिक उक्त पूंजीपति ने जिला प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर और जनहित का वास्ता देकर नदी पर पुल निर्माण की अनुमति प्राप्त कर ली और आनन-फानन में कलकल बहती नदी का गला घोंटकर,जेसीबी की मदद से खुदाई के बाद पुल निर्माण का काम भी जोर-शोर से शुरु कर कर दिया।सूत्रों से पता चला है कि पुल निर्माण के लिये जिला प्रशासन द्वारा दिये गये अनुमति पत्र की कई शर्तों का भी उक्त पूंजीपति द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है।मामले को लेकर क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुल बनने के बाद उक्त पूंजीपति की नदी के दूसरे किनारे पर स्थित जमीन सीधे मुख्य मार्ग से जुड़ जायेगी जिससे उसकी जमीन का भाव कई गुना बढ़ जायेगा।अब सवाल उठता है कि उक्त पूंजीपति की जमीन की कुल कीमत एकाएक कई करोड़ बढ़ने से राज्य सरकार के राजस्व में कितनी बढ़ोत्तरी होगी ?क्या तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों/कर्मचारियों से सेटिंग-गेटिंग का खेल खेलकर सार्वजनिक हित के नाम पर पुल निर्माण की अनुमति हासिल की गई है ?सवाल तो ये भी उठाये जा रहे हैं कि जिले के एक वरिष्ठतम अधिकारी ने आखिर अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले उक्त पूंजीपति को पुल निर्माण के लिये क्यों अनुमति पत्र जारी कर दिया ?आखिर उक्त अधिकारी को ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि अपने कार्यकाल के अंतिम दिन जहां अमूमन अधिकारी पुरानी और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित करने वाली फाइलों का निपटारा करते हैं जबकि उक्त वरिष्ठ अधिकारी ने मात्र एक दिन पूर्व अधीनस्थों से प्राप्त आख्या रिपोर्ट के आधार पर पूंजीपति की जमीन की कीमत में करोड़ों का इजाफा करने का आधार स्तम्भ बनने वाले पुल निर्माण के लिये अनुमति पत्र जारी कर दिया !बहरहाल उपरोक्त सवालों के अलावा पुल निर्माण से जुड़े और भी कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब तो आरटीआई से प्राप्त जानकारी के गहन विश्लेषण के पश्चात ही प्राप्त हो सकेगा।
विशेष:-पूंजीपति को प्राप्त पुल निर्माण के अनुमति पत्र से सम्बंधित खबर में शीघ्र ही परत दर परत खुलासा किया जायेगा कि कैसे उसकी जमीन की कीमत में करोड़ों का इजाफा कराने के लिये पूरा सिस्टम ही मानो बिजली की रफ़्तार से दौड़ पड़ा था !
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