जानिये…! कैसे नदी किनारे निस्तारित हो रहा पाश कालोनियों का कूड़ा ? निगम के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में ठिकाने लगाने का खेल जारी !!


रुद्रपुर।जिला मुख्यालय की कई रिहायशी कालोनियों में स्वच्छ भारत मिशन को पटरी से उतारने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है।खास तौर से रुद्रपुर नगर निगम क्षेत्र का विस्तार होने के बाद जहां निगम के संसाधनों पर तो बोझ बढ़ा लेकिन परिसीमन के बाद निगम क्षेत्र में शामिल कुछ पाश कालोनियों के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली सोसायटियों द्वारा मनमानी के कई मामले सामने आने लगे हैं।आप को बता दें कि वर्ष 2018 में परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रुद्रपुर नगर निगम से सटी करीब 11 ग्रामसभाओं को निगम में शामिल किया गया था।निगम विस्तारीकरण के बाद निगम में वार्डों की संख्या 20 से बढ़कर कुल 40 हो गई थी।निगम का क्षेत्रफल 805.26 हेक्टेयर से बढ़कर 5522.05 हेक्टेयर हो गया जबकि जनसंख्या भी 88815 के बजाय 175723 पर जा पहुंची।इस दौरान ओमेक्स,मेट्रोपोलिस,अलायंस किंगस्टन समेत बगवाड़ा व फुलसुंगी इत्यादि क्षेत्रों की दर्जनों कालोनियां भी निगम क्षेत्र में समाहित हो गईं।लेकिन सूत्रों के मुताबिक कुछ पाश कालोनियों का कूड़ा नगर निगम को ना मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में ठिकाने लगाया जा रहा है।जानकारी के मुताबिक इन पाश कालोनियों के अपने खुद के प्राइवेट कूड़ा वाहन हैं जो कालोनी में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करके कूड़े को निगम द्वारा निर्धारित डंपिंग जोन में ना डालकर सोसायटी प्रबंधन द्वारा तय स्थानों पर निस्तारित कर रहे हैं।इतना ही नहीं एक पाश कालोनी का कूड़ा तो शहर से बाहर कलकल बह रही एक नदी के किनारे पर फेंका जा रहा है।नदी किनारे जब कूड़े के ढेर का आकार बढ़ जाता है तो उसे जेसीबी की मदद से नदी की दिशा में ढकेल दिया जाता है जिससे नदी के आसपास के साफ सुथरे वातावरण के प्रदूषित होने का खतरा मंडराने लगा है।







